Thursday, January 18, 2007

आधे अधुरे ख्वाब

"जागे है देर तक हमे कुछ देर सोने दो,
थोडी सी रात और है सुबह तो होने दो!
आधे अधुरे ख्वाब जो पुरा ना हो सके,
एकबार फिरसे नीदमे वो ख्वाब बोने दो!!"

Every rehman album has to have a great finale, specially with the words of Gulzar, here in Guru, this one is just that!

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